अर्पित बड़कुल/दमोह: भारत में कदंब के पेड़ को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं हैं. इस पेड़ को देववृक्ष यानी देवताओं का पेड़ कहा जाता है. धार्मिक महत्व के अलावा कंदब का पेड़ कई गंभीर बीमारियों के लिए भी रामबाण इलाज है. बुंदेलखंड के दमोह के ग्रामीण क्षेत्रों में कदंब का पेड़ पूजनीय तो है ही, इसका आयुर्वेद में भी बड़ा महत्व है.
बताया गया कि इस पेड़ के पत्ते के प्रयोग से लीवर स्वस्थ रहता है. इसका अर्क त्वचा रोगों के लिए औषधि का काम करता है. प्राचीन काल में त्वचा रोगों का उपचार करने के लिए इस पेड़ के अर्क का पेस्ट बनाकर उपयोग किया जाता था. पेड़ का अर्क व्यक्ति को बैक्टीरिया से बचाता है. इसके अलावा, नियमित तौर पर इसका लेप चेहरे पर लगाने से निखार आता है.
फल ही नहीं पत्ते और छाल भी हैं उपयोगी
कदंब का वृक्ष, फल, फूल और छाल कई औषधीय गुणों से भरपूर है, जिसका उल्लेख सुश्रुत जैसे ग्रंथों में किया गया है. आयुर्वेद के मुताबिक, इसका फल शरीर के तीनों दोष (वात, कफ, पित्त) को कंट्रोल करने वाला है. पुरुषों के लिए भी कदंब का फल बहुत फायदेमंद है. इसका सेवन स्पर्म काउंट बढ़ाने और शरीर को अंदरूनी मजबूती प्रदान करता है. कदंब के फल की तासीर कड़वी होती है और इसमें मौजूद गुण शरीर की कई गंभीर समस्याओं के लिए रामबाण इलाज हैं.
घाव पर डाल दो घोल तो हो जाए ठीक!
आयुर्वेद डॉ. दीप्ति नामदेव ने बताया कि हिंदू मान्यताओं के अनुसार, कदंब का पेड़ पूजनीय तो है ही, इसका आयुर्वेद में बड़ा महत्व है. कदंब के पेड़ का उपयोग कई मेडिसिन तैयार करने में किया जाता है. धार्मिक दृष्टि से यह पेड़ भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा हुआ है. वहीं आयुर्वेदिक दृष्टि से यह पेड़ बहुत लाभाकारी है. शरीर में लगे घाव पर इसकी छाल से तैयार किए गए घोल को डाला जाए तो घाव पूरी तरह से ठीक हो जाता है. शरीर को मजबूत करने के लिए इसके फल का उपयोग किया जाता है. इसका पाउडर बनाकर त्वचा पर लेप किया जाए तो निखार आता है.